Kuldhara Haunted Places | यहां देखें: कुलधरा गांव की 10 सबसे रहस्यमई भुतहा जगहें कौन सी है

Kuldhara Haunted Places | यहां देखें: कुलधरा गांव की 10 सबसे रहस्यमई भुतहा जगहें कौन सी है

Table of Contents

1. कुलधरा गाँव के खंडहर में तब्दील खाली मकान

Kuldhara Haunted Places

कुलधरा गाँव के Kuldhara Haunted Places राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित हैं। जो सन् 1825 के बाद से आज तक वीरान पड़े हैं। क्योंकि पालीवाल ब्राह्मण समुदाय ने एक ही रात में इस पूरे गाँव को छोड़ दिया था। किंतु जाते-जाते उन्होंने इन मकानों पर ऐसा श्राप दे दिया था। कि यहाँ कोई भी दोबारा से बस नहीं पाया।

भुतहा क्यों है:- क्योंकि यहां रात के अँधेरे में इन खंडहरों से अजीब आवाजें, सुबकने और पैरों की आवाजे सुनाई देती है।

किसलिए जाना जाता है:- यह मकान बिना किसी मरम्मत के 200 साल से भी अधिक समय से खड़े हुए हैं। जो अपनी राजस्थानी वास्तुकला की दृष्टि से भी हैरान करने वाले हैं।

रहस्यमई घटनाएं:- Paranormal Society of India की एक टीम ने 2012 में यहाँ रात बिताई थी। जिसमें उन्हें थर्मल कैमरों पर अज्ञात परछाइयाँ और छोटे बच्चों के रोने की आवाजें उन्होंने रिकॉर्ड की।

पर्यटक भ्रमण:- ASI (Archaeological Survey of India) द्वारा संरक्षित यह स्थल सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। जबकि सूर्यास्त के बाद यहां प्रवेश कारण पूरी तरह मना है।

2. कुलधरा गाँव का पुराना मंदिर

कुलधरा गाँव के बीच में बना हुआ। यह पुराना शिव का मंदिर तकरीबन 400 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। जो कभी पालीवाल ब्राह्मणों की आस्था का केंद्र हुआ करता था। हालांकि गाँव छोड़ने के बाद भी। ग्रामीणों ने इस मंदिर को ही अपनी आत्मा का निवास बताया था।

भुतहा क्यों है:- स्थानीय लोगों का मानना है। कि रात को मंदिर की घंटी अपने आप बजती रहती है। और दीपक भी अपने आप ही जलने लगता है।

किसलिए जाना जाता है:- नागर शैली की वास्तुकला में बना हुआ यह मंदिर। जिसकी दीवारें आज भी उस काल की नक्काशी को समेटे हुए हैं। जिसे देखने के लिए इतिहास प्रेमी दूर-दूर से यहां आते रहते हैं।

रहस्यमई घटनाएं:- 2019 में एक पर्यटक समूह ने दावा किया था। कि उन्होंने मंदिर परिसर में एक सफेद साड़ी पहनी हुई। किसी महिला को देखा था। मगर पल भर में वह मंदिर से गायब हो गई। वहीं Rajasthan Tourism Portal भी इस मंदिर को “हॉन्टेड हेरिटेज” की सूची में रखता है।

पर्यटक भ्रमण:- दिन में यहाँ फोटोग्राफी की अनुमति है। हालाँकि शाम 5 बजे के बाद, मंदिर परिसर में जाना बिल्कुल मना है।

3. कुलधरा की बावड़ी और कुआँ

कुलधरा की बावड़ी गाँव के उत्तरी हिस्से में स्थित है। जो हमेशा पालीवाल ब्राह्मणों के जल तकनीकी की अद्भुत विरासत को दर्शाती है। क्योंकि यह बावड़ी करीब 15वीं-16वीं सदी के बीच बनाई गई थी। किंतु गाँव के वीरान होने के बाद। यह काल की भेंट चढ़ती गई।

भुतहा क्यों है:- कहा जाता है कि गाँव छोड़ते वक्त। कुछ बुजुर्गों ने इस कुएँ में कूदकर अपनी जान दे दी थी। जिसकी वजह से यहाँ नकारात्मक ऊर्जा का वास भी माना जाता है।

किसलिए जाना जाता है:- इसके पानी में आज भी एक खास किस्म की खिंचाव-शक्ति महसूस होती है। इसलिए पर्यटक यहाँ घूमने चले आते हैं।

रहस्यमई घटनाएं:- कई पर्यटकों ने यह बताया है। कि बावड़ी के पास खड़े होने पर उन्हें पीछे से धकेले जैसा एहसास होता है। जबकि वहाँ देखने पर कोई मौजूद नहीं होता है। क्योंकि ASI की रिपोर्ट में भी इस स्थान को “Psychologically Sensitive Zone” बताया गया है।

पर्यटक भ्रमण:- बावड़ी के चारों ओर अब सुरक्षा रेलिंग लगाई जा चुकी है। जिससे पर्यटक बड़े ध्यान से अब दूरी से भी इसे देख सकते हैं।

4. कुलधरा गाँव की तंग गलियां

कुलधरा की तंग गलियाँ, इस गाँव की सबसे डरावनी और रहस्यमई पहचान मानी जाती हैं। जो उस काल की सामाजिक संरचना को भी दर्शाती हैं। हालांकि यह गलियाँ इस प्रकार बनाई गई थीं। कि बाहरी आक्रमणकारी आसानी से रास्ता न खोज सकें।

भुतहा क्यों है:- इन संकरी गलियों में दिन के उजाले में भी एक अजीब ठंडक और घुटन महसूस होती है। मानो कोई अदृश्य साया पास में चल रहा हो।

किसलिए जाना जाता है:- इन गलियों में घूमने से आज भी 200 साल पुराने गाँव का अहसास होता है। क्योंकि यहाँ की दीवारें, देहलीजें और कुछ द्वार अभी भी जीवित हैं।

रहस्यमई घटनाएं:- 2017 में एक वीडियोग्राफर टीम यहाँ फिल्म बनाने के लिए आई थी। जिसमें उनके कैमरे बार-बार खराब होते रहे। और रात को रिकॉर्डिंग में अजीब सी आवाजें कैद हुईं।

पर्यटक भ्रमण:- गाइड के साथ इन गलियों में घूमना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। हालाँकि रात में यहाँ जाना पूरी तरह मना है।

5. कुलधरा गाँव का अंतिम सिरा (रेगिस्तान की ओर)

अंतिम सिरा, मतलब कुलधरा का वह अंतिम छोर है। जो थार के रेगिस्तान से बिल्कुल सटा हुआ है। लेकिन यह सबसे डरावना भी माना जाता है। क्योंकि इसी रास्ते से पालीवाल ब्राह्मण रात के अँधेरे में अपना गांव छोड़कर चले गए थे। हालांकि इस सिरे पर बालू के टीले और टूटी हुई दीवारें एक भयावह दृश्य बनाती हैं।

भुतहा क्यों है:- यहाँ रात को रेत में पैरों के निशान। अपने आप बनते और मिटते देखे जाते हैं। जबकि वहाँ कोई भी इंसान नहीं होता है।

किसलिए जाना जाता है:- यह स्थल रेगिस्तान और खंडहर के संगम का एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करता है। इसलिए फोटोग्राफर और रहस्य प्रेमियों के लिए यह पसंदीदा जगह मानी जाती है।

रहस्यमई घटनाएं:- The Times of India की एक रिपोर्ट (2018) के अनुसार, एक परिवार ने यहाँ शाम ढलते ही रुककर देखा था। कि रेत में एक बुजुर्ग व्यक्ति चलता हुआ दिखा। और देखते ही देखते वह रेत में समा गया।

पर्यटक भ्रमण:- दिन के उजाले में यह स्थान ट्रेकिंग और फोटोग्राफी के लिए उत्तम मानी जाती है। किंतु सूर्यास्त के बाद यहाँ रुकना खतरनाक भी माना जाता है।

6. कुलधरा गाँव का पंचायत चौक

कुलधरा का पंचायत चौक वह स्थान माना जाता है। जहाँ कभी पालीवाल ब्राह्मणों की सभाएं हुआ करती थीं। और गाँव के बड़े फैसले भी पंचायत चौक से ही लिए जाते थे। लेकिन माना जाता है कि जिस रात ग्रामीणों ने। गांव को छोड़ने के पलायन का निर्णय लिया था। वह आखिरी बैठक इसी चौक में हुई थी।

भुतहा क्यों है:- इस चौक में खड़े होने पर। कई पर्यटकों को एकाएक बेचैनी और घुटन का एहसास होता है। जैसे सैकड़ों लोगों की आत्माएं आपके इर्द-गिर्द घूम रही हों।

किसलिए जाना जाता है:- यह कुलधरा की ऐतिहासिक पहचान का केंद्र माना जाता है। जहाँ गाँव की पूरी सामाजिक व्यवस्था की झलक देखने को मिलती है।

रहस्यमई घटनाएं:- एक पैरानॉर्मल जाँच दल ने 2021 में यहाँ EMF (Electromagnetic Field) मीटर से असामान्य रूप से ऊँचा विद्युत-चुंबकीय स्तर मापा था। जिसे अलौकिक गतिविधियों का संकेत भी माना जाता है।

पर्यटक भ्रमण:- यह चौक पुरातत्व विभाग के मानचित्र में चिह्नित है। और दिन में स्वतंत्र रूप से भी देखा जा सकता है।

7. कुलधरा गाँव के पालीवाल ब्राह्मणों की हवेलियां

पालीवाल ब्राह्मणों की हवेलियाँ कुलधरा की सबसे भव्य किंतु सबसे भयावह संरचनाएं मानी जाती हैं। क्योंकि यह हवेलियाँ 12वीं-13वीं सदी की वास्तुकला का नमूना हैं। जिनमें झरोखे, मेहराबें और बारीक नक्काशी आज भी देखी जा सकती है।

भुतहा क्यों है:- हवेलियों की ऊपरी मंजिलों पर कई पर्यटकों ने अजीब परछाइयाँ और दर्पण में अपना नहीं बल्कि किसी और का चेहरा देखने का दावा भी किया है।

किसलिए जाना जाता है:- ASI की संरक्षण रिपोर्ट के अनुसार, यह हवेलियाँ बिना किसी आधुनिक सामग्री के सिर्फ चूने और पत्थर से बनाई गई थी जो उस काल की उन्नत इंजीनियरिंग का प्रमाण हैं।

रहस्यमई घटनाएं:- 2015 में एक YouTuber टीम ने एक हवेली की ऊपरी मंजिल पर रात गुजारी थी। जिसके फुटेज में एक बच्चे की हँसी और कमरे में किसी के चलने की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है।

पर्यटक भ्रमण:- हवेलियों में अंदर जाने की अनुमति ASI गाइड के साथ ही देखने को मिलती है। क्योंकि जर्जर दीवारें कभी भी गिर सकती हैं।

8. कुलधरा गाँव का प्रवेश द्वार

कुलधरा का प्रवेश द्वार जैसलमेर से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। और यह उस श्राप का प्रतीक माना जाता है। जो कभी पालीवाल ब्राह्मणों ने गाँव छोड़ते समय दिया था। हालांकि इस द्वार पर खड़े होकर ही। कई लोगों को पहली बार अजीब-सी ठंडक और बेचैनी का एहसास होता है।

भुतहा क्यों है:- प्रचलित मान्यता है कि जो भी इस द्वार को पार करके अंदर की ओर जाता है। वह यहाँ की नकारात्मक ऊर्जा का कुछ हिस्सा अपने साथ ले जाता है।

किसलिए जाना जाता है:- यह द्वार अपनी अनोखी पत्थर की नक्काशी और राजस्थानी शिल्पकला के लिए बहुत प्रसिद्ध है। जिसे देखने के लिए इतिहासकार और कला प्रेमी दोनों यहां आते हैं।

रहस्यमई घटनाएं:- कुछ पर्यटकों ने दावा किया है। कि प्रवेश द्वार पर रात को एक बुजुर्ग व्यक्ति दिखाई देता है। जो हाथ से रोकने का इशारा भी करता है। मगर पास जाने पर वह पूरी तरह गायब हो जाता है।

पर्यटक भ्रमण:- यह द्वार दिन में सुलभ रहता है। और यहाँ एक छोटी सी टिकट खिड़की भी बनी हुई है। जहाँ से प्रवेश शुल्क लेकर अंदर की ओर जाया जा सकता है।

9. कुलधरा गाँव का श्मशान मार्ग

कुलधरा गाँव से बाहर निकलते पर। एक संकरा रास्ता श्मशान की ओर जाता हुआ दिखाई देता है। जिसे गाँव का सबसे अशुभ और डरावना स्थान माना जाता है। क्योंकि इस मार्ग पर जाने से आज भी स्थानीय लोग बचते हैं। क्योंकि यहाँ रात को अजीब घटनाएं होने की बातें पीढ़ियों से चली आ रही हैं।

भुतहा क्यों है:- इस मार्ग पर दोपहर के बाद भी। हवा अचानक रुक जाती है। और एक अजीब-सी गंध फैलने लगती है। जिसे बुजुर्ग लोग श्मशान की आत्माओं की उपस्थिति बताते हैं।

किसलिए जाना जाता है:- गाँव छोड़ने के बाद, जो लोग पीछे रह गए या बीमार पड़ गए थे। उनका अंतिम संस्कार इसी मार्ग पर हुआ था। इसलिए यह ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

रहस्यमई घटनाएं:- 2020 में एक यात्री ने। इस मार्ग पर अपनी बाइक रोकी तो उसका इंजन अचानक बंद हो गया। और दोबारा स्टार्ट भी नहीं हुआ। फिर उसे बाद में 2 किलोमीटर दूर जाकर मदद मिली थी। जहाँ जाकर बाइक अपने आप चालू हो गई।

पर्यटक भ्रमण:- इस मार्ग पर ASI का कोई आधिकारिक दौरा नहीं होता है। इसलिए यहाँ अकेले जाना सही नहीं है।

10. कुलधरा गाँव की बाहरी चारदीवारी

कुलधरा गाँव की बाहरी चारदीवारी पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा। बाहरी खतरों की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी। किंतु विडंबना यह है कि जिस दीवार ने उन्हें सुरक्षित रखना था। वही दीवार उनके जाने के बाद एक अभिशाप की निशानी बन गई। ओर यह चारदीवारी आज भी अधूरी-टूटी अवस्था में खड़ी हुई है।

भुतहा क्यों है:- चारदीवारी की दरारों से रात को रोशनी की लकीरें निकलती दिखाई देती हैं। जबकि आसपास कोई प्रकाश-स्रोत नहीं होता है।

किसलिए जाना जाता है:- यह चारदीवारी पालीवाल ब्राह्मणों की उस स्थापत्य शैली का उदाहरण है। जो उन्होंने थार की रेत और पत्थर से मिलाकर बनाई थी।

रहस्यमई घटनाएं:- Rajasthan Heritage Conservation Society के शोधकर्ताओं ने 2022 में इस दीवार के पास थर्मल स्कैनिंग की, जिसमें दीवार के एक हिस्से का तापमान बाकी हिस्सों से 3-4 डिग्री कम पाया गया था। जिसका कोई वैज्ञानिक कारण भी नहीं मिला था।

पर्यटक भ्रमण:- चारदीवारी के बाहर से फोटोग्राफी दिन में ली जा सकती है। जबकि रात में यहाँ किसी को भी रुकने की अनुमति नहीं मिलती है।

11. निष्कर्ष

कुलधरा गांव बस खाली मकानों का ढेर नहीं माना जाता है। बल्कि यहां की हर ईंट, हर टूटी दीवार में कोई न कोई रहस्य छुपा बैठा हुआ है। जो उस 1825 वाली रात के वीरान होने के पीछे की कहानी, यहां गांव में देखने को मिलती है।

खंडहरनुमा गलियां: यार, कुलधरा की ये टूटी-फूटी गलियां दिन में तो बस वीरान रहती हैं, लेकिन जैसे ही सूरज डूबता है, माहौल में एक अजीब सी घबराहट घुल जाती है। आसपास के लोग भी बोलते हैं, यहां रात के वक्त कुछ गड़बड़ सा फील होता है।

परित्यक्त घर: इन घरों में कदम रखते ही, बिना किसी वजह के ठंडक हड्डियों में उतर जाती है। छतें-दीवारें कब की जर्जर हो चुकी हैं। फिर भी उनके अंदर वो पुराना डर और सैकड़ों साल पुरानी कहानियां आज भी जिंदा हैं।

देवालय और चौक: गांव का मंदिर या चौक, रात को देखते ही रहस्य की चादर ओढ़ लेते हैं। कई टूरिस्ट्स ने भी बताया कि यहां रात में किसी के चलने की आवाजें सुनाई देती हैं। या फिर अचानक कोई परछाईं दिख जाती है।

कुल मिलाकर: कुलधरा का डर सिर्फ भूत-प्रेत तक सीमित नहीं है। बल्कि यह गांव अपने अंदर 19वीं सदी के पलायन, समाज की तंग सोच और लोगों की किवदंतियों की पूरी गाथा साथ समेटकर बैठा हुआ है।

ASI हो या राजस्थान टूरिज्म, सबने कहीं न कहीं इस दर्द और रहस्य की बात बताई हुई है।

12. 7 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. कुलधरा गांव की परित्यक्त गलियां भुतहा क्यों मानी जाती हैं।

उत्तर: 19वीं सदी से ही यह गलियां वीरान पड़ी हुई हैं। ओर अब सुनसान जगह में सन्नाटा होने की वजह से। कुलधरा गांव की गालियां भुतहा मानी जाती है।

प्रश्न 2. कुलधरा के परित्यक्त घरों से जुड़ी भुतहा मान्यता क्या है।

उत्तर: लोगों के हिसाब से रात में यहां से अजीब-अजीब आवाजें आती रहती हैं। फिर भी, यहां से कोई ठोस सबूत देखने को नहीं मिला है।

प्रश्न 3. कुलधरा का प्राचीन मंदिर भुतहा क्यों कहा जाता है।

उत्तर: शाम ढलते ही इस मंदिर में परछाइयों के किस्से हवा में तैरने लगते हैं। इसीलिए शायद यह मंदिर भुतहा माना जाता है।

प्रश्न 4. कुलधरा का मुख्य चौक भुतहा स्थल कैसे बना।

उत्तर: जब पूरा गांव एक झटके में खाली हो गया था। तो वो जगह अपने आप रहस्यमय बन गई थी।

प्रश्न 5. कुलधरा के कुएं भुतहा क्यों माने जाते हैं।

उत्तर: कुएं, पानी और यहां का डरावना सन्नाटा मिलकर। जो माहौल बनाते हैं। जिससे कोई भी पर्यटक घबरा जाता है। इसीलिए कुलधरा गांव का कुआं भुतहा स्थल माना जाता है।

प्रश्न 6. कुलधरा गांव को ASI भुतहा मानता है क्या।

उत्तर: असल में ASI वाले इसे ऐतिहासिक गांव या जगह मानते हैं। वह इसे भुतहा नहीं मानते है।

प्रश्न 7. कुलधरा में सबसे अधिक भुतहा कौन सा स्थान है?

उत्तर: गांव के लोग बताते हैं। श्मशान का रास्ता और गांव का आखिरी छोर (जहां से रेगिस्तान शुरू होता है)।

सबसे डरावने स्थान या जगह माने जाते हैं। क्योंकि रात में वहां अजीब रोशनी भी दिखाई देती है।

Author (India World History)

  • मेरा नाम ललित कुमार (रवि) है। और में फिलहाल N.H.8, भीम, राजसमंद, राजस्थान में रह रहा हूँ।

    में खुद को एक इतिहासकार कहूं. तो शायद गलत नही होगा. क्योंकि इतिहास के विषयों की दुनिया ने मुझे इतना अनुभव दिया है।

    की मुझे अलग से एक इतिहासकार बनने की पढ़ाई या उसके खिलाफ अध्ययन करने की जरूरत नहीं है।

    इसीलिए मैं, फिलहाल हमारी कंपनी इंडिया वर्ल्ड हिस्ट्री पर. खुद को मुख्य लेखक और इतिहास का शोधकर्ता समझता हूँ।

    यही नहीं मैंने भारतीय पब्लिक स्कूल (BPS) चौधरी चरण सिंह कॉलोनी नवलगढ़ रोड़ सीकर से 12TH की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी।

    इतिहास विषयों की जानकारियों में मेरे पास. 2026 से पहले 4 वर्षो का अनुभव शामिल हैं।

    All History Post (India World History)

Leave a Comment