अखंड भारत से यह 9 देश अलग हुए। जानिए वह कौन कौन से देश है। जो कभी अखंड भारत में शामिल थे।

अखंड भारत से यह 9 देश अलग हुए। जानिए वह कौन कौन से देश है। जो कभी अखंड भारत में शामिल थे।

देश का नामअलग होने का वर्षप्रमुख कारण
अफगानिस्तान1748 ई.अहमद शाह अब्दाली का उदय और ब्रिटिश-रूस की “ग्रेट गेम”
नेपाल1816 (सुगौली संधि)गोरखा युद्ध और ब्रिटिश का दबाव
भूटान1907ब्रिटिश बफर स्टेट वाली नीति
म्यांमार1937/1948ब्रिटिश प्रशासनिक विभाजन
श्रीलंका1948ब्रिटिश उपनिवेश और पाक जलसंधि
भारत15 अगस्त 1947स्वतंत्रता संग्राम (आजादी की लड़ाई)
पाकिस्तान14 अगस्त 1947धार्मिक विभाजन और द्विराष्ट्र सिद्धांत
बांग्लादेश16 दिसंबर 1971मुक्तिसंग्राम और भाषाई अस्मिता
मालदीव26 जुलाई 1965ब्रिटिश प्रोटेक्ट्रेट का अंत

प्राचीन काल में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और उसके आसपास के सभी क्षेत्रों को। एकजुट सांस्कृतिक इकाई के रूप में देखा जाता था। जहां सभी धर्म, वर्ग के लिए रहा करते थे।

जिसमें हिमालय से लेकर। हिंद महासागर तक का पूरा जमीनी इलाका फैला हुआ था। किंतु समय के साथ बाहरी आक्रमणों, औपनिवेशिक षड्यंत्रों और राजनीतिक कारणों से यह अखंड भारत टुकड़ों में बंटता चला गया।

जहां मौर्य काल में सम्राट अशोक के नेतृत्व में भारत का साम्राज्य तक्षशिला से ईरान तक फैला हुआ था। लेकिन गुप्त वंश के पतन के बाद। अखंड भारत के टूटने की प्रक्रिया ओर भी तेज हो गई। आज भारतीय उपमहाद्वीप में भारत सहित कुल नौ देश स्थित हैं।

जहां अखंड भारत से यह 9 देश अलग हुए। जिनमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव शामिल है। जिनमें से आगे चलकर प्रत्येक की अपनी अलग ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान बन गई है।

1. अफगानिस्तान (18वीं सदी में अलग हुआ गंधार)

अखंड भारत से यह 9 देश अलग हुए

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: अफगानिस्तान का प्राचीन नाम गंधार हुआ करता था। जिसका नाम महाभारत काल में भी देखने को मिलता है। वहीं गांधारी और शकुनी को भी इसी जगह का माना जाता हैं।

लेकिन मौर्य, कुषाण और गुप्त साम्राज्यों के दौरान। यह इलाका कभी भारतीय साम्राज्य का अभिन्न अंग हुआ करता था। और अफगानिस्तान के अंदर ही बौद्ध धर्म का भी प्रचार-प्रसार हुआ था।

लेकिन 18वीं सदी में अहमद शाह अब्दाली (दुर्रानी) ने। 1748 ई. में अफगानिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित कर दिया। और 1919 में ब्रिटेन से पूर्ण स्वतंत्रता (आजादी) प्राप्त हुई।

अलग होने के कारण:

  1. इस्लामिक आक्रमण:- यह बात 7वीं-8वीं सदी के बाद की है। जब अरब और तुर्क आक्रमणकारियों के कारण। अफगानिस्तान की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान धीरे-धीरे भारत से अलग होने लगी।
  2. मुगल साम्राज्य की दुर्बलता:- 18वीं सदी में मुगल शासन के कमजोर पड़ने के बाद। अफगान क्षेत्र को केंद्रीय शक्ति से आजादी मिलने लगी।
  3. ग्रेट गेम (Great Game):- ब्रिटेन और रूस के बीच। मध्य एशिया में कब्जा करने के लिए। लड़ाई में लंबी प्रतिस्पर्धा में अफगानिस्तान को एक “बफर स्टेट” बना दिया गया।
  4. डूरंड रेखा:- 1893 में ब्रिटेन ने डूरंड रेखा खींचकर। अफगानिस्तान और ब्रिटिश जब भारत पर शासन कर रहा था। तब भारत ओर अफगानिस्तान के बीच सीमा को लागू किया।

परिणाम: अफगानिस्तान का भारत से अलग होना। मतलब दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बदलने वाली घटना मानी जाती हैं। इससे भारत की उत्तर-पश्चिमी की सीमा टूटने लगी। और बाद में पाकिस्तान के कब्जे में आने के बाद। यह अफगानिस्तान वाला क्षेत्र और अधिक मजबूत हो गया।

वर्तमान भूगोल:-

  1. राजधानी:- अफगानिस्तान की राजधानी काबुल है।
  2. क्षेत्रफल:- अफगानिस्तान का क्षेत्रफल लगभग 6.52 लाख वर्ग किलोमीटर है।
  3. भूगोल:- अफगानिस्तान में पहाड़ी और अर्ध-शुष्क क्षेत्र, हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला प्रमुख माने जाते है।
  4. वर्तमान शासन:- 2021 से तालिबान का शासन चल रहा है।

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: अफगानिस्तान में पश्तो और दारी (फारसी) दो प्रमुख भाषाएं बोली जाती हैं। यहां की संस्कृति में मध्य एशियाई, ईरानी और दक्षिण एशियाई परंपराओं का मिलाझूला मिश्रण देखने को मिलता है।

लेकिन यहां रहने वाली 99 प्रतिशत से अधिक जनता मुस्लिम वर्ग की है। फिर भी, प्राचीन गंधार कला और बामियान के बौद्ध स्तूपों के रूप में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रमाण आज भी यहां मौजूद हैं

2. नेपाल (सुगौली संधि से सीमित हुआ स्वतंत्र राज्य)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: हमेशा की तरह, नेपाल सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से भारत के सबसे पड़ोसी देश रहा है। और यह महाभारत काल से भी भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र में माना जाता है। क्योंकि जब मौर्य और गुप्त साम्राज्य का समय चल रहा था। तब नेपाल में भी भारत की संस्कृति चल रही थी।

फिर भी, नेपाल ने अपनी संप्रभुता कभी पूरी तरह नहीं खोई। क्योंकि नेपाल हमेशा एक अर्ध-स्वतंत्र राज्य की तरह रहा हैं। लेकिन 1814-1816 के गोरखा युद्ध और उसके बाद सुगौली संधि ने। नेपाल की सीमाओं को लागू कर दिया।

अलग होने के कारण:

  1. सुगौली संधि 1816:- नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच। 1814-1816 के गोरखा युद्ध के बाद। सुगौली संधि (Treaty of Sugauli) हुई। जिसके तहत नेपाल ने सिक्किम, कुमाऊं, गढ़वाल और तराई के कुछ क्षेत्र। उस वक्त की ब्रिटिश सरकार मतलब आज के भारत देश को सौंप दिए।
  2. ब्रिटिश प्रभाव क्षेत्र:- नेपाल ने अपनी आंतरिक स्वायत्तता बनाए रखी। लेकिन विदेश नीति में ब्रिटिश की हुकूमत रही।
  3. 1947 की स्वतंत्रता:- भारत को आजादी मिलने के बाद। नेपाल ने 1949 में भारत के साथ एक नई दोस्ती की शुरुआत की।

परिणाम: नेपाल एकमात्र ऐसा देश माना जाता हैं। जो अखंड भारत का हिस्सा होते हुए भी। कभी पूरी तरह ब्रिटिश शासन का नहीं बना। हालांकि सुगौली संधि के परिणामस्वरूप नेपाल ने अपने कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र खोए। लेकिन संप्रभुता बनाए रखी।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- काठमांडू
  2. क्षेत्रफल:- लगभग 1.47 लाख वर्ग किलोमीटर माना जाता हैं।
  3. भूगोल:- उत्तर में हिमालय (माउंट एवरेस्ट सहित), मध्य में पहाड़ी क्षेत्र और दक्षिण में तराई का मैदान देखने को मिलता है।
  4. सीमाएं:- उत्तर में चीन और बाकी सभी तरफ भारत

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: नेपाल की संस्कृति में भारतीय हिंदू और बौद्ध परंपरा एकसाथ है। लेकिन यहां की जनसंख्या में हिंदू (लगभग 81%) और बौद्ध (लगभग 9%) प्रमुख हैं।

फिर भी, नेपाली भाषा भारत की हिंदी से बहुत मिलती-जुलती है। और दोनों देशों के बीच बिना वीजा आवागमन की व्यवस्था भी देखने को मिलती है। जो इनके गहरे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।

3. भूटान (1907 में अलग किया गया हिमालयी राज्य)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भूटान प्राचीन काल से भारतीय बौद्ध संस्कृति का हिस्सा रहा है। और इसे “भोट-अंत” (तिब्बत की अंतिम सीमा) से भूटान नाम मिला था। क्योंकि मौर्य काल में बौद्ध धर्म का प्रसार यहां तक हुआ था।

लेकिन ब्रिटिश काल में 1865 की सिनचुला संधि के बाद। भूटान भी ब्रिटिश शासन में आ गया। फिर भी, 1907 में भूटान के अंदर राजशाही की स्थापना हुई। और ब्रिटिश भारत ने इसे तिब्बत को बफर स्टेट बनाने से पूर्व अलग देश का दर्जा दे दिया।

अलग होने के कारण:

  1. ब्रिटिश रणनीति:- 1906-1907 में ब्रिटिश सरकार ने भूटान को भारत से अलग कर एक अलग देश का दर्जा दिया। क्योंकि वे तिब्बत और रूस के प्रभाव को रोकने के लिए एक बफर राज्य चाहते थे।
  2. 1910 की पुनाखा संधि:- इस संधि के तहत ब्रिटिश सरकार ने भूटान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने पर सहमति दी। लेकिन भूटान की विदेश नीति ब्रिटेन के हाथ में रही।
  3. 1949 की भारत-भूटान संधि:- भारत की स्वतंत्रता के बाद 1949 में भारत-भूटान मैत्री संधि हुई। जिसके तहत भारत ने भूटान की जमीन वापस की और रक्षा का वचन दिया।

परिणाम: भूटान आज एक संवैधानिक राजतंत्र है। जो अपनी विशिष्ट “सकल राष्ट्रीय खुशी (Gross National Happiness)” नीति के लिए विश्वविख्यात है। भारत और भूटान के बीच आज भी अत्यंत घनिष्ठ संबंध हैं।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- थिम्फू
  2. क्षेत्रफल:- लगभग 38,394 वर्ग किलोमीटर
  3. भूगोल:- पूर्णतः हिमालयी पर्वतीय देश, भारत की सबसे छोटी स्थलीय सीमा भूटान से ही लगती है।
  4. सीमाएं:- उत्तर में चीन (तिब्बत), दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में भारत

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: भूटान में बौद्ध धर्म (वज्रयान शाखा) प्रमुख धर्म है। और यह देश की संस्कृति का केंद्रबिंदु है। यहां की राजभाषा जोंगखा भाषा मानी जाती है। क्योंकि भूटान अपनी अनूठी पर्यावरण नीति और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए जाना जाता है। यहां विदेशी पर्यटन नियंत्रित और सीमित है। जिससे यहां की संस्कृति और प्रकृति सुरक्षित है।

4. म्यांमार (1937 में अलग किया गया बर्मा)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: म्यांमार जिसका पूर्व नाम बर्मा हुआ करता था। यह प्राचीन काल से ही भारत की संस्कृति से प्रभावित वाला इलाका हुआ करता था। क्योंकि मौर्य काल में यहां बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ था। और कई सदियों तक यह क्षेत्र भारतीय व्यापार और संस्कृति से जुड़ा रहा।

लेकिन ब्रिटिश काल में बर्मा को भारत के साथ ही शासित किया जाता था। किंतु अंग्रेजों ने 1937 में बर्मा को भारत से प्रशासनिक रूप से अलग कर दिया। ओर एक अलग उपनिवेश बना दिया। ओर यह बात 1948 कि है। जब बर्मा ने पूर्ण आजादी प्राप्त की।

अलग होने के कारण:

  1. ब्रिटिश प्रशासनिक विभाजन:- 1937 में अंग्रेजों ने प्रशासनिक सुविधा के लिए। बर्मा को भारत से अलग कर दिया। जो कभी अखंड भारत के विखंडन का एक महत्वपूर्ण चरण हुआ करता था।
  2. नस्लीय और भाषाई भिन्नता:- बर्मी भाषा और तिब्बती-बर्मी नस्लीय पहचान भारत के मुख्य जनसमूह से भिन्न थी। जिसे अंग्रेजों ने भी विभाजन का आधार बनाया था।
  3. द्वितीय विश्वयुद्ध:- 1942-45 के दौरान, जापानी कब्जे ने बर्मा को और अलग कर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा मिली।
  4. 1948 की स्वतंत्रता:- 4 जनवरी 1948 को म्यांमार देश को। ब्रिटेन से पूरी आजादी मिल गई।

परिणाम: म्यांमार के अलग होने से। भारत की पूर्वी सीमा पर एक स्वतंत्र देश का उदय हुआ। जिसे म्यांमार कहा जाने लगा। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की भूमि-सीमाएं प्रभावित हुईं। और व्यापारिक मार्ग बाधित हुए।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- नेपीदॉ (Naypyidaw)
  2. क्षेत्रफल:- लगभग 6.76 लाख वर्ग किलोमीटर
  3. सीमाएं:- उत्तर में चीन, उत्तर-पश्चिम में भारत, पश्चिम में बांग्लादेश, पूर्व में थाईलैंड और लाओस
  4. प्रमुख नदी:- इरावदी

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: म्यांमार में 90 प्रतिशत से अधिक जनता बौद्ध धर्म का पालन करती है। जो भारतीय बौद्ध विरासत का प्रत्यक्ष प्रमाण है। क्योंकि बर्मी भाषा यहां की राजभाषा मानी जाती है।

और यहां की संस्कृति में बौद्ध मठ, पगोडा और लोक परंपराएं प्रमुख हैं। हालांकि वर्तमान में म्यांमार सैन्य तख्तापलट (2021) के बाद राजनीतिक संकट से गुजर रहा है।

5. श्रीलंका (पाक जलसंधि से अलग द्वीप राष्ट्र)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: श्रीलंका (प्राचीन नाम लंका, सिंहलद्वीप) का जिक्र रामायण में भी। देखने को मिलता है। और यह भारतीय संस्कृति से सहस्राब्दियों से जुड़ा रहा है। वहीं सम्राट अशोक (268-232 ई.पू.) के पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा ने यहां बौद्ध धर्म का प्रचार किया था।

जिसके परिणामस्वरूप बौद्ध धर्म श्रीलंका का मुख्य धर्म बन गया। और श्रीलंका आज भी बहुसंख्यक धर्म माना जाता है। जहां 1310 में अंग्रेजों ने श्रीलंका को चोल और पांड्य शासन से छुड़ाकर। अपने अधीन कर लिया था। और 4 फरवरी 1948 को श्रीलंका ने फिर से स्वतंत्रता प्राप्त की।

अलग होने के कारण:

  1. भौगोलिक विशिष्टता:- श्रीलंका पाक जलसंधि (Palk Strait) द्वारा। आज भारत की जमीन से अलग है। जो लगभग 80 किलोमीटर चौड़ी है। और इसे एक स्वाभाविक रूप से अलग भूखंड बनाती है।
  2. ब्रिटिश औपनिवेशिक नीति:- अंग्रेजों ने श्रीलंका (तब सीलोन) को भारत से अलग उपनिवेश के रूप में शासित किया था।
  3. 1972 में नामकरण:- 1972 तक यह देश “सीलोन” के नाम से जाना जाता था। उसके बाद इसका नाम “श्रीलंका” रखा गया।

परिणाम: श्रीलंका की स्वतंत्रता के बाद। भारत और श्रीलंका के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंध बने रहे। हालांकि 1980 के दशक में तमिल-सिंहली संघर्ष और भारतीय शांति सेना के हस्तक्षेप ने। दोनों देशों के संबंधों को कठिन बना दिया।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- कोलंबो (वाणिज्यिक राजधानी), श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे (विधायी राजधानी)
  2. क्षेत्रफल:- लगभग 65,610 वर्ग किलोमीटर
  3. भूगोल:- हिंद महासागर में स्थित द्वीप, उष्णकटिबंधीय जलवायु, चाय और रबर के बागान

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: श्रीलंका में 70 प्रतिशत से अधिक सिंहली बौद्ध रहते हैं। जबकि तमिल हिंदू और मुस्लिम अल्पसंख्यक भी रहते हैं। वहीं यहां की सिंहली और तमिल दो प्रमुख भाषाएं हैं। लेकिन यहां की 90 प्रतिशत साक्षरता दर दक्षिण एशिया में सर्वोच्च मानी जाती है। श्रीलंका में बौद्ध मठ, प्राचीन स्तूप और हिंदू मंदिर दोनों प्रकार की धरोहर मौजूद हैं।

6. भारत (अखंड भारत का केंद्र और उत्तराधिकारी)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत का इतिहास वैदिक काल से प्रारंभ होता है। जब यह हिमालय से लेकर दक्षिणी सागर तक। एक अखंड सांस्कृतिक भूखंड हुआ करता था। भारत की आधुनिक गणराज्य के रूप में स्थापना 15 अगस्त 1947 को हुई थी।

जब ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से भारत देश को आजादी मिली। इसके बाद, 26 जनवरी 1950 को भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बनकर तैयार हुआ। जब इसी समय संविधान भी लागू हो चुका था।

कारण और परिणाम:

  1. मौर्य साम्राज्य का विस्तार:- तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य पश्चिम में ईरान (तब पर्शिया) से लेकर। पूर्व में बंगाल और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में तमिलनाडु तक फैला हुआ था।
  2. विखंडन का दौर:- 185 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद। क्रमशः कई क्षेत्र अलग होते गए। और अखंड भारत का स्वरूप सिकुड़ता चला गया।
  3. ब्रिटिश उपनिवेशवाद:- अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” नीति ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों को धीरे-धीरे अलग करना शुरू कर दिया। और 1947 में अंतिम और सबसे बड़ा विभाजन हुआ।
  4. स्वतंत्रता का परिणाम:- 1947 में स्वतंत्रता मिलने के साथ-साथ। देश का धार्मिक आधार पर विभाजन हुआ। और पश्चिम में पाकिस्तान तथा पूर्व में पूर्वी पाकिस्तान (जो बाद में बांग्लादेश बना) का जन्म हुआ।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- नई दिल्ली
  2. क्षेत्रफल:- 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर (विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश)
  3. सीमाएं:- उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान व अफगानिस्तान, उत्तर में चीन व नेपाल, पूर्व में बांग्लादेश व म्यांमार, दक्षिण में श्रीलंका (समुद्री सीमा)
  4. जनसंख्या:- विश्व में प्रथम स्थान (लगभग 145 करोड़)

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: भारत आज विविधता में एकता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है। क्योंकि यहां सभी धर्म के लोग रहते हैं। जहां 22 मान्यता प्राप्त भाषाएं और सैकड़ों बोलियां बोली जाती हैं।

यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी। सभी धर्मों के अनुयायी मिलकर रहते हैं। वहीं भारत की संस्कृति में योग, आयुर्वेद, नृत्य-संगीत, स्थापत्य कला और साहित्य का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। जो इसे विश्व की प्राचीनतम जीवित सभ्यताओं में से एक बनाता है।

7. पाकिस्तान (1947 का दर्दनाक विभाजन)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: पाकिस्तान की स्थापना 14 अगस्त 1947 को हुई थी। जब ब्रिटिश भारत का धार्मिक आधार पर विभाजन किया गया। यह विभाजन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे दर्दनाक अध्याय माना जाता है।

पाकिस्तान का क्षेत्र प्राचीन काल में मौर्य, कुषाण और गुप्त साम्राज्यों का हिस्सा हुआ करता था। और वर्तमान बलूचिस्तान में मेहरगढ़ में 7,000 ईसा पूर्व तक खेती के सबूत मिलते हैं। जो दक्षिण एशिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक मानी जाती है।

अलग होने के कारण:

  1. द्विराष्ट्र सिद्धांत:- मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने यह विचार रखा। कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। और इन्हें अलग देश चाहिए।
  2. ब्रिटिश रणनीति:- अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” नीति ने सांप्रदायिक दरारें और गहरी कर दीं। जिससे विभाजन अनिवार्य बना दिया गया।
  3. माउंटबेटन योजना:- लॉर्ड माउंटबेटन की योजना के अनुसार। 3 जून 1947 को विभाजन की घोषणा की गई। और सर सिरिल रेडक्लिफ ने भारत-पाकिस्तान की सीमा रेखा (रेडक्लिफ लाइन) खींची।
  4. सांप्रदायिक दंगे:- विभाजन के समय हुए भयंकर सांप्रदायिक दंगों में लाखों लोग मारे गए। और लगभग 1.5 करोड़ लोगों का विस्थापन हुआ।

परिणाम: 1947 के विभाजन के परिणामस्वरूप न केवल भारत और पाकिस्तान बने। बल्कि दोनों देशों के बीच कश्मीर समस्या जैसे विवाद भी उत्पन्न हुए। क्योंकि 1971 में पाकिस्तान का पूर्वी भाग बांग्लादेश के रूप में अलग हो गया। जिससे पाकिस्तान का विभाजन एक बार फिर हुआ।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- इस्लामाबाद
  2. क्षेत्रफल:- लगभग 8.81 लाख वर्ग किलोमीटर
  3. जनसंख्या:- लगभग 22 करोड़ (विश्व का छठा सबसे अधिक आबादी वाला देश)
  4. प्रमुख प्रांत:- पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: पाकिस्तान में 98 प्रतिशत जनता मुस्लिम है। जबकि हिंदू, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक भी निवास करते हैं। जहां की राष्ट्रीय भाषा उर्दू है। हालांकि पंजाबी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। वहीं पाकिस्तान की संस्कृति में दक्षिण एशियाई, फारसी और मध्य एशियाई परंपराओं का मिश्रण शामिल है।

8. बांग्लादेश (1971 का मुक्तिसंग्राम)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बांग्लादेश का क्षेत्र प्राचीन काल में बंग और वंग राज्यों का हिस्सा हुआ करता था। और यह मौर्य तथा गुप्त साम्राज्यों के अधीन भी रहा। लेकिन 1947 के विभाजन में यह क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान के नाम से पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।

किंतु 16 दिसंबर 1971 को शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में और भारतीय सेना की सहायता से पाकिस्तान से स्वतंत्र होकर बांग्लादेश का जन्म हुआ।

अलग होने के कारण:

  1. 1947 का विभाजन:- धार्मिक आधार पर हुए विभाजन में बांग्लादेश। बिना किसी भौगोलिक संपर्क के पाकिस्तान देश का पूर्वी हिस्सा बांग्लादेश बन गया था। जबकि दोनों के बीच। हजारों किलोमीटर का भारतीय क्षेत्र शामिल था।
  2. भाषाई अत्याचार:- 1952 में पाकिस्तानी सरकार ने उर्दू को एकमात्र राजभाषा घोषित किया। जिसका बंगाली भाषियों ने कड़ा विरोध किया और “भाषा आंदोलन” (Language Movement) की शुरुआत हुई।
  3. आर्थिक शोषण:- पाकिस्तान की केंद्र सरकार पूर्वी पाकिस्तान के संसाधनों का दोहन करती थी। लेकिन विकास में भी भेदभाव करती थी।
  4. मुक्तिसंग्राम 1971:- पाकिस्तानी सेना द्वारा बंगाली आबादी पर हुए अत्याचारों के विरोध में। सशस्त्र मुक्तिसंग्राम शुरू हुआ। और भारत के सैन्य हस्तक्षेप के बाद। 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ।

परिणाम: बांग्लादेश की स्वतंत्रता ने दक्षिण एशिया के राजनीतिक नक्शे को पूरी तरह बदल दिया। लेकिन पाकिस्तान कमजोर हुआ। और भारत की क्षेत्रीय शक्ति के रूप में प्रतिष्ठा बढ़ी। रवींद्रनाथ ठाकुर की “अमार सोनार बांग्ला” रचना बांग्लादेश का राष्ट्रगान बनी।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- ढाका
  2. क्षेत्रफल:- लगभग 1.47 लाख वर्ग किलोमीटर
  3. सीमाएं:- तीन तरफ भारत, एक तरफ म्यांमार और दक्षिण में बंगाल की खाड़ी
  4. प्रमुख नदियां:- गंगा (पद्मा), ब्रह्मपुत्र (यमुना) और मेघना

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: बांग्लादेश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम-बहुल राष्ट्र माना जाता है। किंतु बंगाली भाषा और संस्कृति यहां की प्राथमिक पहचान है। यहां की संस्कृति में बंगाली साहित्य, संगीत, नाटक और लोककला का समृद्ध भंडार है।

9. मालदीव (1965 में स्वतंत्र हुआ हिंद महासागर का द्वीपसमूह)

स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मालदीव हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह है। जो भारतीय समुद्री व्यापार नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था। लेकिन प्राचीन काल में मालदीव पर भारतीय हिंदू और बौद्ध प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखता था। और यहां हिंदू राजाओं का शासन भी था।

12वीं सदी में यहां इस्लाम का आगमन हुआ। और यह धीरे-धीरे मुस्लिम राष्ट्र बन गया। फिर भी, 19वीं सदी में ब्रिटेन का संरक्षित क्षेत्र बना। और 26 जुलाई 1965 को मालदीव ने पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त की।

अलग होने के कारण:

  1. भौगोलिक अलगाव:- मालदीव भारत की मुख्यभूमि से सैकड़ों किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। इसलिए प्राचीन काल से ही यह एक अलग प्रशासनिक इकाई रहा हैं।
  2. इस्लामीकरण:- 12वीं सदी में यहां इस्लाम के आगमन ने मालदीव को सांस्कृतिक रूप से भारत से दूर किया।
  3. ब्रिटिश संरक्षण:- 19वीं सदी में ब्रिटेन का संरक्षित क्षेत्र बनने के बाद। मालदीव औपनिवेशिक ढांचे में भारत से अलग हो गया।
  4. 1965 की स्वतंत्रता:- ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद। मालदीव एक स्वतंत्र गणराज्य बन गया।

परिणाम: मालदीव आज हिंद महासागर की भू-राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत और मालदीव के बीच घनिष्ठ सम्बंध हैं। लेकिन हाल ही के वर्षों में चीन का प्रभाव भी बढ़ा है। जो भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है।

वर्तमान भूगोल:

  1. राजधानी:- माले (Malé)
  2. क्षेत्रफल:- लगभग 298 वर्ग किलोमीटर (दक्षिण एशिया का सबसे छोटा देश)
  3. भूगोल:- 1,192 प्रवाल द्वीपों (Coral Islands) से बना देश, समुद्र तल से औसत ऊंचाई मात्र 1.5 मीटर
  4. स्थिति:- भारत के लक्षद्वीप से दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित

वर्तमान सांस्कृतिक पहचान: मालदीव में लगभग 100 प्रतिशत जनता सुन्नी मुस्लिम है। ओर यहां की धीवेही भाषा राजभाषा मानी जाती है। जो संस्कृत और अरबी के मिश्रण से विकसित हुई है।

हालांकि यह भारतीय प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है। मालदीव का अस्तित्व जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जलस्तर से खतरे में है। जो वर्तमान में इस देश की सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है।

क्या आप इनका इतिहास भी देखना चाहेंगे…

  1. चित्तौड़गढ़ किले का इतिहास
  2. कुंभलगढ़ किले का इतिहास

निष्कर्ष

अखंड भारत से अलग हुए ये सभी नौ देश। जिनमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव शामिल है। लेकिन आज भले ही राजनीतिक दृष्टि से स्वतंत्र और अलग हों। फिर भी, इनकी सांस्कृतिक जड़ें एक ही भूमि से जुड़ी हुई हैं।

भारत की मौर्य, गुप्त और अन्य साम्राज्यों की महान परंपरा इन सभी देशों की संस्कृति, भाषा, धर्म और कला में आज भी दिखाई देती है। चाहे वह श्रीलंका का बौद्ध धर्म हो, नेपाल की हिंदू संस्कृति हो, मालदीव की धीवेही भाषा हो। या म्यांमार के बौद्ध मठ। यह साझी विरासत ही अखंड भारत की सच्ची पहचान है। जो राजनीतिक सीमाओं से परे आज भी जीवित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. अखंड भारत में कुल कितने देश आते थे?

उत्तर: अखंड भारत में कुल 9 देश शामिल हुआ करते थे। जिनमें
1. अफगानिस्तान: 1748 ईस्वी से पहले। यह अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था।

2. नेपाल: 1816 (सुगौली संधि) से पहले। यह भी अखंड भारत के हिस्से में शामिल था।

3. भूटान: 1907 से पहले यह भी अखंड भारत में शामिल था।

4. म्यांमार: 1937/1948 के बंटवारे से पहले। यह भी अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था।

5. श्रीलंका: 1948 से पहले अखंड भारत का हिस्सा था।

6. भारत: 15 अगस्त 1947 से पहले। भारत देश भी अखंड भारत में शामिल था। ओर यह देश ही अखंड भारत से अलग अलग हुआ मुख्य देश है।

7. पाकिस्तान: 14 अगस्त 1947 से पहले। पाकिस्तान की जमीन भी भारत देश की थी। जो अखंड भारत का एक प्रमुख हिस्सा हैं।

8. बांग्लादेश: 16 दिसंबर 1971 से पहले। बांग्लादेश भी अखंड भारत का हिस्सा था।

9. मालदीव: 26 जुलाई 1965 से पहले। मालदीव भी अखंड भारत में शामिल था।

Author (India World History)

  • मेरा नाम ललित कुमार (रवि) है। और में फिलहाल N.H.8, भीम, राजसमंद, राजस्थान में रह रहा हूँ।

    में खुद को एक इतिहासकार कहूं. तो शायद गलत नही होगा. क्योंकि इतिहास के विषयों की दुनिया ने मुझे इतना अनुभव दिया है।

    की मुझे अलग से एक इतिहासकार बनने की पढ़ाई या उसके खिलाफ अध्ययन करने की जरूरत नहीं है।

    इसीलिए मैं, फिलहाल हमारी कंपनी इंडिया वर्ल्ड हिस्ट्री पर. खुद को मुख्य लेखक और इतिहास का शोधकर्ता समझता हूँ।

    यही नहीं मैंने भारतीय पब्लिक स्कूल (BPS) चौधरी चरण सिंह कॉलोनी नवलगढ़ रोड़ सीकर से 12TH की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी।

    इतिहास विषयों की जानकारियों में मेरे पास. 2026 से पहले 4 वर्षो का अनुभव शामिल हैं।

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