
बाबर के भारत आने की पूरी प्रक्रिया, किसने बुलाया, कैसे आया, बाद में क्या हुआ
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जहीर-उद-दीन मुहम्मद जिसे बाबर के नाम से भी जाना जाता हैं। जिसने हिंदुस्तान में मुगल साम्राज्य की नींव रखी थी। जिसको एक अनुभवी ओर सेना का मुख्य सेनापति माना गया हैं। उसे युद्ध लड़ने का बहुत अच्छा खासा ज्ञान था। जिसकी वजह बाबर के भारत आने की पूरी प्रक्रिया में बना।
कारण
बाबर को भारत बुलाने से पहले। महाराणा प्रताप के दादा जिन्हें राणा सांगा के नाम से जाना जाता हैं। उनके ओर दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच। 1517 ईस्वी में खातौली का युद्ध लड़ा गया था। हालांकि इस युद्ध में राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी की सेना को बुरी तरह पराजित कर। लोदी की सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। वही इस हार से लोदी साम्राज्य कमजोर हुआ। खातौली युद्ध के बाद इब्राहिम लोदी ने राणा सांगा से बदला लेने के लिए। फिर से एक ओर युद्ध की घोषणा की। जिसके बाद राणा सांगा ओर सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच।
फिर से 1518 ईस्वी में धौलपुर के पास बाड़ी का युद्ध हुआ। इस युद्ध में भी राणा सांगा के द्वारा। मियां हुसैन और मियां मुखन को हार का सामना करना पड़ा।

इन दोनों युद्धों को हारने से दिल्ली सल्तनत की सैन्य शक्ति और प्रतिष्ठा को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। और राजस्थान व मालवा क्षेत्र में राणा सांगा ने कब्जा कर लिया। इसी तरह दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इब्राहिम लोदी का शासन। 1517 ईस्वी से 1519 ईस्वी के बीच। बहुत कमजोर पड़ने लगा था। दूसरी तरफ वह अपने बड़े भाई दौलत खां लोदी के साथ विवाद में भी पड़ा हुआ था। वही दौलत खां लोदी जो पंजाब का गवर्नर हुआ करता था। उसके भाई इब्राहिम लोदी ने अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए। केंद्रीकरण की नीति का इस्तेमाल किया।
जिसके चलते दौलत खान लोदी की पंजाब में शक्ति और प्रभाव दोनो कम होने लगे। क्योंकि दौलत खान लोदी की अपनी इच्छा थीं। की वह पंजाब में अपनी स्वतंत्र सत्ता को स्थापित कर सके। जिसके लिए इस बात से इब्राहिम लोदी की केंद्रीय सत्ता स्वीकार नहीं कर रही थी। जिससे वह इब्राहिम लोदी से नाराज होकर। उनके प्रति विद्रोह करने के लिए तैयार था। तभी दौलत खां और इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान ने मिलकर। बाबर को भारत में आने का न्योता भेजकर बुलाना उचित समझा।
इसके बाद दौलत खान लोदी ने अपने संदेशवाहकों (दूतों) या कुछ ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार अपने पुत्र दिलेवर खान या कुछ विशेष दूतों को भेजकर न्योता दिया था।
ताकि वह अपनी सैन्य शक्ति के बल पर युद्ध लड़के। इब्राहिम लोदी को पराजित कर सके। इसी तरह दौलत खां और इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान का मूल कारण इब्राहिम लोदी को सत्ता से हटाना था। जिसके पीछे कुछ निम्नलिखित कारणों को भी माना जाता हैं। जिसके पहले कारण में दौलत खान चाहता था। कि बाबर इब्राहिम लोदी को हराकर। दिल्ली सल्तनत से लोदी वंश का अंत करे। दूसरे कारण में वह चाहता था कि बाबर इब्राहिम लोदी को हराने के बाद वापस काबुल चला जाए। जिससे वह पंजाब में अपनी स्वतंत्र सत्ता को स्थापित कर सके। तीसरे कारण में इब्राहिम लोदी से हुए अपमान और दुर्व्यवहार का बदला भी लेना था।
दूसरी तरफ बाबर को भारत में बुलाने के लिए। राणा सांगा की कोई राजनीतिक इच्छा नहीं मानी जाती हैं। क्योंकि बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में लिखा है। कि जब वह काबुल में था। तब राणा सांगा का एक दूत शुभकामनाएं लेकर। उसके पास आया था। राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी के खिलाफ मिलकर लड़ने का प्रस्ताव रखा था। जिसमें राणा सांगा के उस दूत ने। बाबर को यह योजना बताई थी। कि जब बाबर दिल्ली की तरफ से हमला करेगा। तो राणा सांगा आगरा या पश्चिम की ओर से इब्राहिम लोदी पर आक्रमण करके उनका साथ देंगे।
बल्कि यह कहना गलत साबित होगा। की बाबर को आमंत्रण देकर। भारत बुलाने वाले राणा सांगा थे। क्योंकि राणा सांगा ने खुद 1517 ईस्वी में खातौली के युद्ध और 1518 ईस्वी में धौलपुर के पास बाड़ी के युद्ध में। इब्राहिम लोदी को 2 बार युद्ध में पराजित किया था।
प्रस्थान

बाबर जो खुद 1525 ईस्वी में। काबुल से भारत पर आक्रमण करने की योजना बना रहा था। क्योंकि उस समय भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। यहां उसका लक्ष्य भारत से बड़ा धन इकठ्ठा करना। तथा भारत पर राज करना था। हालांकि उसके लिए दौलत खां लोदी का आमंत्रण खास सिद्ध होने वाला था। इसीलिए नवंबर 1525 ईस्वी को बाबर काबुल से प्रस्थान करता है। जिसके पास 12,000 की सैन्य शक्ति का बल साथ होता है। जिसमें तोपें ओर बारूद भी शामिल थे। यह वही समय था। जब बाबर भारत में पहली बार तोपें लेकर आ रहा था।
ओर पहली बार तोपों का इस्तेमाल भी उसी ने किया था। काबुल से निकलकर वह पेशावर की ओर बढ़ा। जो काबुल और भारत के बीच एक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता था। पेशावर से निकलकर उसने खैबर दर्रे के रास्ते से भारत में प्रवेश किया। खैबर दर्रा काबुल और पेशावर के बीच एक प्रमुख दर्रा माना जाता है। खैबर दर्रे से गुजरने के बाद। उसने 15 दिसंबर 1525 को बाबर ने सिंधु नदी को पार किया। उसके बाद उसने सिंध और पंजाब पर आक्रमण किया। पंजाब पर विजय प्राप्त करने के बाद। बाबर सिरसा (वर्तमान हरियाणा) पहुँचा। जहां उसको पानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी से सामना करना था।
परिणाम

बाबर के भारत आने के बाद। उसने 21 अप्रैल 1526 में दिल्ली से लगभग 60 किलोमीटर दूर। हरियाणा के पानीपत का पहला युद्ध लड़ा। इस युद्ध में इब्राहिम लोदी के पास 1,00,000 सेना थी। दूसरी तरफ बाबर के पास 12,000 की सेना थी। तभी युद्ध के मैदान में दोनों सेनाएं आमने सामने खड़ी थी। लेकिन बाबर ने सोचा यदि वह पहला हमला करता है। तो उसके जितने की संभावना कम हो जाएगी। इसीलिए उसने 15 अप्रैल 1526 की रात को। अपनी सेना की एक छोटी सी टुकड़ी को। लोदी के कैंप में भेजता है। जिसके बाद लोदी की सेना बाबर द्वारा भेजी गई टुकड़ी को खत्म कर देती है।
इसी खुशी में 21 अप्रैल 1526 ईस्वी की सुबह को। इब्राहिम लोदी की सेना बाबर की सेना पर आक्रमण कर देती है। तभी बाबर की सेना लोदी की सेना पर तोपों से हमला करती हैं। ओर इसी बीच जमीनी युद्ध भी शुरू हो जाता है। जिसके पश्चात यह युद्ध कुछ घंटों तक चलता रहा। श्याम होते ही इब्राहिम लोदी इस युद्ध में मारा जाता है। ओर उसका कटा हुआ सिर बाबर के सामने पेश किया जाता है। इसी तरह यह युद्ध जितने के बाद। बाबर दोबारा काबुल जाने से इनकार कर दिया। ओर पानीपत की लड़ाई जितने के बाद। इसे बहुत ही अधिक मात्रा में धन मिल गया।
जिसका इस्तेमाल उसने जनता की सेवा में कर दिया। और जनता द्वारा बाबर को कलंदर नाम की उपाधि मिलती हैं। इसके बाद बाबर तुरंत आगरा पर कब्जा करके। दिल्ली का नया सुल्तान बन गया। जिसमें बाबर ने खुद को ‘पादशाह’ (सम्राट) की उपाधि दी थी। दूसरी तरफ दौलत खां लोदी का निमंत्रण उन्हीं के लिए घातक साबित हुआ। क्योंकि बाबर ने भारत में ही रुककर। एक घुसपैठी की तरह 1526 ईस्वी में मुगल साम्राज्य की स्थापना की। ओर आगे के 5 सालों में वह 1530 ईस्वी तक। मुगल साम्राज्य की स्थापना करके। अपने साम्राज्य को पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से तक फैला दिया।
बाबर और उसके अनुयायियों ने मिलकर। इस्लाम के प्रचार और जिहाद के नाम पर कई हिंदू मंदिरों को नष्ट किया था। जिसमें अयोध्या का राम मंदिर भी शामिल था। जहां उसने अयोध्या के राम मंदिर को तोड़कर। वहां बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया। इस बाबरी मस्जिद को बाबर के सेनापति मीर बाकी ने 1528 ईस्वी में बनवाया था। तब से लेकर इस मंदिर मस्जिद की इस घटना ने। सांप्रदायिक विभाजन या हिंदू मुस्लिम दंगों की नींव रखी थी। जिसको लेकर हिंदू मुस्लिम की लड़ाइयां। आज भी होती रहती हैं। लेकिन अब अयोध्या में बाबरी मस्जिद को तोड़कर। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में। फिर से भगवान श्री राम का भव्य मंदिर का शुभारंभ कर दिया गया हैं।
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